नितिन गडकरी का बड़ा बयान पेट्रोल-डीजल और गैस आयात पर Rs 22 लाख करोड़ बाहर जा रहे
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भारत के बढ़ते जीवाश्म ईंधन आयात बिल को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भारत पेट्रोल, डीजल और गैस जैसे ईंधनों के आयात पर करीब ₹22 लाख करोड़ देश से बाहर भेज रहा है। गडकरी ने चीनी मिलों से केवल चीनी उत्पादन पर निर्भर रहने के बजाय बायोफ्यूल और अन्य वैल्यू-एडेड उत्पादों की ओर बढ़ने की अपील की।
चीनी मिलों को CBG और बायो-मैन्योर बनाने की सलाह
गडकरी ने चीनी मिलों से गन्ने के अवशेष और दूसरे कृषि अपशिष्ट का बेहतर इस्तेमाल करने को कहा। उन्होंने Compressed Bio-Gas (CBG), ethanol, bio-manure और Sustainable Aviation Fuel (SAF) जैसे उत्पादों के उत्पादन पर जोर दिया।
उनके मुताबिक, गन्ने और कृषि अवशेषों को कचरे के रूप में फेंकने के बजाय उनसे CBG बनाया जा सकता है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में अतिरिक्त आय और रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। साथ ही, वैकल्पिक ईंधनों के इस्तेमाल से पेट्रोलियम और गैस के आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
किसानों की आय बढ़ाने पर भी जोर: नितिन गडकरी
नितिन गडकरी ने कहा कि चीनी मिलों में वैल्यू-एडेड उत्पादों का उत्पादन बढ़ने से किसानों को भी बेहतर भुगतान करने की क्षमता विकसित हो सकती है। उन्होंने गन्ने से बनने वाले विभिन्न उत्पादों से मिलने वाली अतिरिक्त आय का इस्तेमाल किसानों के भुगतान को बढ़ाने में करने की बात कही।
उन्होंने भारत में चीनी उत्पादन और घरेलू खपत के बीच अंतर का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, देश में चीनी का उत्पादन घरेलू जरूरतों से अधिक होने पर उद्योग को कीमतों और अतिरिक्त स्टॉक जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में चीनी के साथ दूसरे उत्पादों का निर्माण उद्योग के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
पराली से CBG बनाने पर भी जोर
गडकरी ने कृषि अपशिष्ट, खासकर धान की पराली, को ऊर्जा में बदलने की संभावनाओं पर भी बात की। उन्होंने पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में उपलब्ध बड़ी मात्रा में पराली का इस्तेमाल CBG बनाने में करने पर जोर दिया।
उन्होंने बताया कि देश में बड़ी संख्या में CBG प्लांट रजिस्टर्ड हैं, लेकिन उनमें से अभी सीमित संख्या में ही प्लांट संचालन में हैं। उनका कहना है कि CBG क्षेत्र में मौजूद संभावित क्षमता का पूरा इस्तेमाल किया जाए तो भारत के ऊर्जा क्षेत्र में इसका बड़ा योगदान हो सकता है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल सकता है फायदा
नितिन गडकरी के अनुसार CBG और अन्य बायोफ्यूल का विस्तार ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नए अवसर पैदा कर सकता है। कृषि अवशेषों की खरीद, परिवहन, प्लांट संचालन, बायो-मैन्योर उत्पादन और ईंधन वितरण से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर विकसित हो सकते हैं।
इस मॉडल में किसानों के लिए कृषि अवशेष केवल कचरा नहीं रहेंगे, बल्कि अतिरिक्त आय का स्रोत बन सकते हैं। वहीं CBG प्लांट से निकलने वाले जैविक अवशेषों का इस्तेमाल बायो-मैन्योर के रूप में किया जा सकता है।
Sustainable Aviation Fuel पर भी फोकस
नितिन गडकरी ने चीनी उद्योग से Sustainable Aviation Fuel यानी SAF जैसे भविष्य के ईंधनों के उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ने का भी आग्रह किया। विमानन क्षेत्र में वैकल्पिक ईंधन की मांग बढ़ने के साथ SAF को भविष्य के महत्वपूर्ण विकल्पों में शामिल किया जा रहा है।
चीनी मिलों और कृषि क्षेत्र से निकलने वाले विभिन्न जैविक अवशेषों का इस्तेमाल ऐसे ईंधनों के उत्पादन के लिए किया जा सकता है। इससे कृषि आधारित अर्थव्यवस्था और ऊर्जा क्षेत्र के बीच नई औद्योगिक संभावनाएं विकसित हो सकती हैं।
नितिन गडकरी का मुख्य संदेश
नितिन गडकरी के बयान का मुख्य फोकस यह है कि भारत के कृषि और चीनी उद्योग को केवल पारंपरिक चीनी उत्पादन तक सीमित नहीं रहना चाहिए। चीनी, ethanol, CBG, bio-manure और Sustainable Aviation Fuel जैसे कई उत्पादों के जरिए एक व्यापक bioeconomy विकसित की जा सकती है।
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उनके अनुसार, कृषि कचरे को ऊर्जा और उपयोगी उत्पादों में बदलने से किसानों की अतिरिक्त आय, ग्रामीण रोजगार, कचरा प्रबंधन और ऊर्जा सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में अवसर पैदा हो सकते हैं। साथ ही, भारत के बड़े पेट्रोलियम और गैस आयात बिल को कम करने में घरेलू वैकल्पिक ईंधनों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।