इंजीनियरिंग की डिग्री नहीं, 13 साल की मेहनत से उत्तराखंड के शख्स ने बनाई उड़ने वाली कार
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उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के रहने वाले रवि तम्टा ने अपनी मेहनत और तकनीक सीखने के जुनून से एक ऐसा प्रोटोटाइप तैयार किया है, जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। बिना इंजीनियरिंग की डिग्री के उड़ने वाला वाहन बनाने की उनकी कोशिश भारतीय नवाचार की एक दिलचस्प मिसाल बनकर सामने आई है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रवि तम्टा ने HAPIDA SKYNeX नाम का एक इलेक्ट्रिक उड़ने वाला वाहन विकसित किया है। बताया जाता है कि उन्होंने इस प्रोजेक्ट पर कई वर्षों तक काम किया और तकनीक से जुड़ी जानकारी ऑनलाइन संसाधनों तथा अपने प्रयोगों के जरिए हासिल की।
2015 में देखा था उड़ने वाली कार बनाने का सपना
रिपोर्ट्स के मुताबिक, रवि तम्टा ने वर्ष 2015 में उड़ने वाला वाहन बनाने का सपना देखा था। इसके बाद उन्होंने इस दिशा में लगातार सीखना और प्रयोग करना शुरू किया। उनके पिता हरीश राम मोटर मैकेनिक हैं। तकनीक में रुचि और व्यावहारिक अनुभव ने रवि को अपने विचार को वास्तविक रूप देने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
क्या है HAPIDA SKYNeX?
HAPIDA SKYNeX एक सिंगल-सीटर इलेक्ट्रिक उड़ने वाला वाहन है, जिसमें कई रोटर का इस्तेमाल किया गया है। इस तरह की तकनीक वाहन को हेलीकॉप्टर या बड़े ड्रोन की तरह सीधे ऊपर उठने में मदद कर सकती है।
मीडिया रिपोर्ट्स में इस वाहन की संभावित अधिकतम रफ्तार लगभग 200 किलोमीटर प्रति घंटा बताई गई है। हालांकि, इस गति की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और इसे प्रमाणित प्रदर्शन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
अल्मोड़ा में किया गया परीक्षण
रिपोर्ट्स के अनुसार, अगस्त 2026 में अल्मोड़ा के एक आर्मी हेलीपैड पर इस प्रोटोटाइप का परीक्षण किया गया था। बताया गया कि वाहन लगभग एक मिनट तक हवा में रहा।
यह परीक्षण रवि तम्टा के प्रोजेक्ट के लिए एक महत्वपूर्ण कदम था। हालांकि, वाहन की सुरक्षा, उड़ान की अवधि, वजन उठाने की क्षमता और स्थिरता का आकलन करने के लिए आगे भी कई परीक्षणों की आवश्यकता होगी।
आगे क्या है रवि तम्टा की योजना?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, रवि तम्टा अपने आविष्कार के पेटेंट और आवश्यक नियामकीय मंजूरियों की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं। भारत में इस तरह के वाहन के सार्वजनिक इस्तेमाल से पहले संबंधित विमानन अधिकारियों की आवश्यकताओं को पूरा करना होगा।
फिलहाल HAPIDA SKYNeX को एक प्रोटोटाइप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। इसे आम लोगों के लिए उपलब्ध या व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए मंजूर उड़ने वाली कार कहना अभी उचित नहीं होगा।
पहाड़ी इलाकों में मिल सकता है फायदा
अगर भविष्य में इस तरह की तकनीक सुरक्षित और व्यावहारिक साबित होती है, तो पहाड़ी इलाकों में परिवहन के नए विकल्प विकसित हो सकते हैं। उत्तराखंड जैसे राज्य में दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंचने के लिए ऐसी तकनीक संभावनाएं पैदा कर सकती है।
हालांकि, इसके लिए तकनीकी सुधार, सुरक्षा परीक्षण, बुनियादी ढांचे और सरकारी मंजूरी की जरूरत होगी।
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निष्कर्ष
रवि तम्टा की कहानी बताती है कि किसी नए विचार को वास्तविक रूप देने के लिए लगातार सीखना, प्रयोग करना और मेहनत करना कितना महत्वपूर्ण है। उनका उड़ने वाला वाहन अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन यह भारत में स्वदेशी तकनीकी नवाचार की दिशा में एक उल्लेखनीय प्रयास है।