SIR के खिलाफ छात्रों, किसानों और सामाजिक संगठनों का प्रदर्शन जारी, CEC के इस्तीफे की मांग
नई दिल्ली, 24 अक्टूबर 2026: भारत में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) को लेकर विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। 23 अक्टूबर को दिल्ली में छात्रों, किसानों, युवाओं, महिलाओं और विभिन्न नागरिक संगठनों के सदस्यों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने SIR प्रक्रिया को वापस लेने और मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की।
दिल्ली में सैकड़ों लोगों ने निकाला मार्च
‘People Against SIR’ के बैनर तले प्रदर्शनकारियों ने मध्य दिल्ली में मार्च निकाला। उनका उद्देश्य भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) के मुख्यालय तक पहुंचना था। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रीय ध्वज और बैनर लेकर चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग उठाई।
प्रदर्शन में विभिन्न छात्र संगठनों, किसान संगठनों और नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के कारण कई पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटने का खतरा है या उनके नाम हटाए गए हैं। उन्होंने मांग की कि प्रभावित मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा की जाए।
पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया
जब प्रदर्शनकारी निर्वाचन आयोग के कार्यालय की ओर बढ़े, तो पुलिस ने अशोक रोड के पास बैरिकेड लगाकर उनका रास्ता रोक दिया। पुलिस ने क्षेत्र में लागू प्रतिबंधात्मक आदेशों का हवाला देते हुए प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 23 अक्टूबर को दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के दौरान 100 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया। पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत लागू प्रतिबंधों का उल्लंघन करने के मामले में कार्रवाई भी की।
किसानों और छात्र संगठनों ने भी जताया विरोध
संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) सहित विभिन्न किसान संगठनों ने भी SIR के खिलाफ आवाज उठाई। किसान संगठनों ने अलग-अलग जिलों और तहसील मुख्यालयों पर प्रदर्शन कर अपनी मांगें रखीं। कुछ प्रतिनिधिमंडलों ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को संबोधित ज्ञापन भी अधिकारियों के माध्यम से सौंपे।
छात्र संगठनों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने भी प्रदर्शन का समर्थन किया। आंदोलन से जुड़े संगठनों का कहना है कि मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और किसी भी पात्र नागरिक को मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें क्या हैं?
प्रदर्शन में शामिल संगठनों ने कई मांगें उठाई हैं:
- विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को वापस लिया जाए।
- मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर कार्रवाई की जाए।
- मतदाता सूची से कथित रूप से हटाए गए पात्र मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा की जाए।
- चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।
- शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने के अधिकार का सम्मान किया जाए।
ये मांगें प्रदर्शनकारी संगठनों की ओर से रखी गई हैं। SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर उठाए गए आरोपों का आकलन संबंधित तथ्यों और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर किया जाना चाहिए।
देश के अन्य हिस्सों में भी विरोध
दिल्ली के अलावा, अन्य शहरों में भी SIR के खिलाफ प्रदर्शन आयोजित किए गए। आंदोलन से जुड़े संगठनों ने 18 राज्यों के 88 शहरों में विरोध कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बताई है। उनका कहना है कि वे मतदाताओं के अधिकारों और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़े मुद्दों को उठाते रहेंगे।
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निष्कर्ष
SIR को लेकर जारी विरोध प्रदर्शन ने मतदाता सूची के संशोधन, चुनावी पारदर्शिता और नागरिकों के मतदान के अधिकारों से जुड़े सवालों को फिर चर्चा में ला दिया है। जहां प्रदर्शनकारी प्रक्रिया को वापस लेने और मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, वहीं इस विवाद के समाधान के लिए तथ्यों की जांच, पारदर्शिता और संबंधित संस्थाओं की जवाबदेही महत्वपूर्ण होगी।