सुप्रीम कोर्ट के पास वकीलों की कथित हिरासत पर SCBA ने दाखिल की याचिका
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने 10 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट के पास वकीलों को कथित तौर पर हिरासत में लिए जाने और इलाके में लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर याचिका दाखिल की है। एसोसिएशन ने पुलिस की कार्रवाई, सड़कों पर बैरिकेडिंग, इंटरनेट सेवाएं बंद किए जाने और सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन बंद करने को लेकर चिंता जताई है।
एससीबीए ने अदालत से मामले में हस्तक्षेप करने और संबंधित अधिकारियों से विस्तृत जानकारी मांगने का आग्रह किया है। याचिका में कहा गया है कि अदालतों तक वकीलों और आम नागरिकों की निर्बाध पहुंच सुनिश्चित करना जरूरी है, ताकि न्यायिक कार्यवाही और लोगों के न्याय पाने के अधिकार में बाधा न आए।
याचिका में SCBA ने क्या मांग की?
एससीबीए ने संबंधित अधिकारियों से घटना की विस्तृत रिपोर्ट पेश करने और प्रतिबंधों के कानूनी आधार को स्पष्ट करने की मांग की है। याचिका में कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए हैं।
1. पुलिस से विस्तृत रिपोर्ट की मांग
एससीबीए ने कथित हिरासत की परिस्थितियों, संबंधित पुलिस कार्रवाई और इसमें शामिल अधिकारियों की जानकारी मांगी है। एसोसिएशन चाहता है कि पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो।
2. धारा 163 BNSS के आदेश की प्रति
याचिका में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत जारी आदेश की प्रति उपलब्ध कराने की मांग की गई है। इसके जरिए प्रतिबंधों के कानूनी आधार और उनके दायरे की जानकारी सामने आ सकेगी।
3. CCTV फुटेज और अन्य रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग
एससीबीए ने घटनास्थल से जुड़े CCTV फुटेज और अन्य महत्वपूर्ण रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग की है, ताकि जरूरत पड़ने पर घटना की परिस्थितियों की जांच की जा सके।
4. अदालतों तक निर्बाध पहुंच सुनिश्चित करने की मांग
एसोसिएशन ने जोर दिया है कि वकीलों, मुकदमे से जुड़े पक्षकारों और आम नागरिकों को अदालतों तक पहुंचने में अनावश्यक परेशानी नहीं होनी चाहिए। बैरिकेडिंग और अन्य प्रतिबंधों के कारण न्यायिक कार्य प्रभावित नहीं होना चाहिए।
इंटरनेट बंद करने और मेट्रो स्टेशन बंद होने पर चिंता
याचिका में इंटरनेट सेवाएं बंद किए जाने और सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन को बंद करने का मुद्दा भी उठाया गया है। इंटरनेट और सार्वजनिक परिवहन सेवाएं प्रभावित होने से लोगों को आवागमन तथा जरूरी कामों में परेशानी हो सकती है।
एससीबीए ने इन परिस्थितियों पर स्पष्ट जानकारी देने और यह सुनिश्चित करने की मांग की है कि सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर अदालतों तक पहुंच अनावश्यक रूप से बाधित न हो।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
यह मामला कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगाए जाने वाले प्रतिबंधों और नागरिकों की स्वतंत्र आवाजाही तथा न्याय तक पहुंच के बीच संतुलन से जुड़ा है। वकीलों को अदालतों तक पहुंचने में कठिनाई होने पर न्यायिक कार्यवाही प्रभावित होने की आशंका रहती है।
एससीबीए की याचिका का प्रमुख उद्देश्य कथित हिरासत की परिस्थितियों को स्पष्ट कराना, संबंधित रिकॉर्ड सुरक्षित रखना और अदालतों तक वकीलों तथा आम नागरिकों की निर्बाध पहुंच सुनिश्चित करना है।
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मामले में लगाए गए आरोपों और संबंधित अधिकारियों के पक्ष को अलग-अलग समझना जरूरी है। अंतिम स्थिति अदालत की सुनवाई और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर स्पष्ट होगी।