Deadlock Crude Oil
Iran–US Tensions Hormuz पर बातचीत में गतिरोध, Deadlock Crude Oil की कीमतों में गिरावट
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने और रणनीतिक Strait of Hormuz (होर्मुज़ जलडमरूमध्य) से जहाजों की आवाजाही को लेकर बातचीत में फिलहाल कोई बड़ी सफलता सामने नहीं आई है। दोनों देशों के बीच कई अहम मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं। इसी बीच वैश्विक बाजार में Deadlock Crude Oil कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिली।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य क्यों महत्वपूर्ण है?
होर्मुज़ जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित एक बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। दुनिया के ऊर्जा बाजार के लिए इसका महत्व बहुत ज्यादा है, क्योंकि इसके जरिए बड़ी मात्रा में तेल और अन्य ऊर्जा उत्पादों का परिवहन होता है।
ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के कारण इस मार्ग से जहाजों की आवाजाही को लेकर चिंता बढ़ी हुई है। किसी भी लंबे व्यवधान का असर वैश्विक तेल आपूर्ति और Deadlock Crude Oil कीमतों पर पड़ सकता है।
बातचीत में क्यों बना हुआ है गतिरोध?
अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का एक अहम मुद्दा होर्मुज़ से सुरक्षित और नियमित समुद्री आवाजाही है। दोनों पक्षों की मांगों और शर्तों में अभी भी अंतर बना हुआ है। इसी वजह से बातचीत आगे बढ़ने के बावजूद किसी व्यापक समझौते तक पहुंचना मुश्किल दिखाई दे रहा है।
बाजार के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या दोनों देश ऐसा समझौता कर पाएंगे जिससे समुद्री यातायात सामान्य हो सके। अगर ऐसा होता है तो ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बनी चिंता कम हो सकती है।
फिर Deadlock Crude Oil (तेल ) की कीमतें क्यों गिर गईं?
बातचीत में गतिरोध के बावजूद Deadlock Crude Oil की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। इसका प्रमुख कारण वैश्विक तेल मांग को लेकर कमजोर अनुमान और अमेरिका में कच्चे तेल के भंडार में बढ़ोतरी माना जा रहा है।
13 अगस्त को Brent crude की कीमत लगभग 1.5 प्रतिशत गिरकर करीब 87.69 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी WTI करीब 1.2 प्रतिशत गिरकर लगभग 82 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया।
वैश्विक मांग पर भी नजर
तेल बाजार पर OPEC और International Energy Agency यानी IEA के मांग अनुमानों का भी असर पड़ा है। वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता और ऊर्जा खपत के अनुमान में बदलाव के कारण निवेशकों की चिंता बढ़ी हुई है।
अगर दुनिया में तेल की मांग उम्मीद से कम रहती है, तो भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।
तेल बाजार के सामने दो बड़ी चिंताएं
मौजूदा समय में तेल बाजार दो विपरीत परिस्थितियों के बीच फंसा हुआ है।
पहली चिंता—आपूर्ति: अगर होर्मुज़ से जहाजों की आवाजाही लंबे समय तक बाधित रहती है, तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है।
दूसरी चिंता—मांग: अगर आर्थिक अनिश्चितता के कारण तेल की खपत घटती है, तो कीमतों में तेजी सीमित हो सकती है।
यही संतुलन फिलहाल अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार की दिशा तय कर रहा है।
आगे क्या होगा?
आने वाले दिनों में सबसे ज्यादा नजर अमेरिका-ईरान बातचीत और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात पर रहेगी।
अगर दोनों पक्ष किसी समझौते पर पहुंचते हैं और जहाजों की आवाजाही सामान्य होती है, तो तेल की आपूर्ति को लेकर बाजार की चिंता कम हो सकती है। दूसरी तरफ, अगर तनाव बढ़ता है और होर्मुज़ में स्थिति और बिगड़ती है, तो तेल की कीमतों में फिर से तेज उछाल देखने को मिल सकता है।
फिलहाल स्थिति यह है कि भू-राजनीतिक तनाव तेल की कीमतों को ऊपर खींच रहा है, जबकि कमजोर वैश्विक मांग और अमेरिकी तेल भंडार कीमतों को नीचे दबा रहे हैं। इसी वजह से ईरान-अमेरिका तनाव के बावजूद कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है।