2019-20 की कथित 10 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी मामले में बड़ी कार्रवाई, पूर्व विधायक शाहनवाज राणा की तलाश तेज, जांच में हो सकते हैं नए खुलासे
मुजफ्फरनगर। मुजफ्फरनगर में करोड़ों रुपये की कथित जीएसटी चोरी के मामले में जांच एजेंसियों ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक फैक्टरी मालिक को गिरफ्तार कर लिया है। मेरठ पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने लंबे समय से चल रही जांच के बाद आरोपी जुनेद को दबिश देकर हिरासत में लिया। अधिकारियों के अनुसार यह मामला वर्ष 2019 और 2020 के दौरान हुई लगभग 10 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी से जुड़ा है। गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा और बढ़ गया है तथा मामले से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश तेज कर दी गई है। इस क्रम में पूर्व विधायक शाहनवाज राणा का नाम भी जांच के केंद्र में बना हुआ है।
जांच एजेंसियों का कहना है कि शुरुआती जांच में कई ऐसी वित्तीय गतिविधियां सामने आई थीं जिनमें फर्जी दस्तावेजों, संदिग्ध लेनदेन और कर नियमों के उल्लंघन की आशंका जताई गई थी। इसी आधार पर मामला दर्ज किया गया और बाद में आर्थिक अपराध शाखा को इसकी विस्तृत जांच सौंपी गई। कई वर्षों तक दस्तावेजों की जांच, बैंक खातों के विश्लेषण और विभिन्न विभागों से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर जांच आगे बढ़ती रही। अब इस मामले में पहली बड़ी गिरफ्तारी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार गिरफ्तार आरोपी जुनेद की शैक्षणिक योग्यता केवल चौथी कक्षा तक बताई जा रही है। इसके बावजूद वह करोड़ों रुपये के कारोबार और कंपनियों से जुड़े वित्तीय मामलों में सक्रिय था। जांच अधिकारी यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि इतने बड़े वित्तीय नेटवर्क का संचालन वास्तव में कौन कर रहा था और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका थी। अधिकारियों का मानना है कि गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ में कई अहम जानकारियां सामने आ सकती हैं।
ईओडब्ल्यू की टीम का कहना है कि जीएसटी चोरी से जुड़े मामलों में अक्सर फर्जी फर्मों, कागजी कंपनियों और संदिग्ध बिलिंग का इस्तेमाल किया जाता है। देश के विभिन्न हिस्सों में ऐसे कई मामलों का खुलासा हो चुका है, जहां फर्जी दस्तावेजों के जरिए टैक्स चोरी की गई। मुजफ्फरनगर का यह मामला भी उसी प्रकार की आर्थिक अनियमितताओं से जुड़ा माना जा रहा है।
इस मामले में पूर्व विधायक शाहनवाज राणा का नाम पहले भी कई बार सामने आ चुका है। उन पर जीएसटी से जुड़े मामलों और अन्य आरोपों में विभिन्न कानूनी कार्रवाइयां हो चुकी हैं। वर्ष 2025 में उनके और उनके सहयोगियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत भी मामला दर्ज किया गया था। पुलिस का आरोप था कि फर्जी कंपनियों के माध्यम से कर चोरी और अन्य आर्थिक गतिविधियों को अंजाम दिया गया।
शाहनवाज राणा का नाम उस समय भी सुर्खियों में आया था जब जीएसटी विभाग की एक टीम ने मुजफ्फरनगर स्थित एक फैक्टरी पर छापेमारी की थी। उस कार्रवाई के दौरान टीम पर हमला होने और सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोप लगे थे। बाद में इस मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया गया था और पुलिस ने इसे गंभीर अपराध मानते हुए कार्रवाई की थी।
अब जुनेद की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि वर्ष 2019 और 2020 में हुई कथित जीएसटी चोरी के पीछे पूरा नेटवर्क कैसे काम कर रहा था। पुलिस को उम्मीद है कि आरोपी से पूछताछ के दौरान वित्तीय लेनदेन, फर्जी दस्तावेजों और अन्य संदिग्ध गतिविधियों से जुड़े नए सुराग मिल सकते हैं। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि क्या किसी अन्य व्यक्ति या कारोबारी समूह ने इस नेटवर्क को संचालित करने में भूमिका निभाई थी।
सूत्रों के मुताबिक आर्थिक अपराध शाखा ने कई दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड और कारोबारी लेनदेन से जुड़ी जानकारियां अपने कब्जे में ली हैं। इनकी फॉरेंसिक और वित्तीय जांच कराई जा रही है। यदि जांच में और सबूत सामने आते हैं तो आने वाले दिनों में अन्य आरोपियों के खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि जीएसटी प्रणाली लागू होने के बाद कर चोरी के मामलों पर निगरानी पहले की तुलना में काफी सख्त हुई है। डेटा एनालिटिक्स, डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय ट्रैकिंग की मदद से अब कई वर्षों पुराने मामलों की भी जांच संभव हो रही है। यही कारण है कि पुराने मामलों में भी लगातार कार्रवाई देखने को मिल रही है।
फिलहाल जुनेद की गिरफ्तारी को इस पूरे मामले में अहम सफलता माना जा रहा है। वहीं पूर्व विधायक शाहनवाज राणा की तलाश जारी है और जांच एजेंसियां उनसे जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, करोड़ों रुपये की कथित जीएसटी चोरी के इस मामले की पूरी तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।